ज़रा तू देख ले प्यारे ये दुनिया क्यों परेशां है
किसी की आँखों में दहशत तो कोई दिल से हैराँ है
किसी की आँखों में दहशत तो कोई दिल से हैराँ है
कभी इक दौर था जब हार होती थी बुराई की
मगर अब हारते हैं वो जो काफी दिल से नादाँ हैं
मगर अब हारते हैं वो जो काफी दिल से नादाँ हैं
वो अपने बच्चों की आँहों से माओं का सिहर जाना
मगर हालात है वो उनके ही दर्दों से अनजाँ हैं
मगर हालात है वो उनके ही दर्दों से अनजाँ हैं
दर-ओ -दिवार दुनियां की इन मजदूरों पे टिकती है
मगर दो चार दाने को तरसती उनकी ही जाँ है
मगर दो चार दाने को तरसती उनकी ही जाँ है
कभी मैं सोचता हूँ की बदल डालू ये दुनिया को
मगर पूरे नहीं होते सभी जो दिल के अरमाँ हैं l
मगर पूरे नहीं होते सभी जो दिल के अरमाँ हैं l
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