ऐ मेरी जान-ए-जिगर तूने ये दिल तोड़ दिया
तन्हा क्यों राह-ए-मोहब्बत में मुझे छोड़ दिया
तन्हा क्यों राह-ए-मोहब्बत में मुझे छोड़ दिया
लाख वार सह के ये दिल जो न टूट सका
वो, बेवफाई के खंज़र से तूने तोड़ दिया
वो, बेवफाई के खंज़र से तूने तोड़ दिया
साथ फूलों का किया काँटों से बचता ही गया
आज फूलों ने सभी साथ मेरा छोड़ दिया
आज फूलों ने सभी साथ मेरा छोड़ दिया
प्यार मुझ पर तेरा इस बार तो कुछ यूँ आया
बेवफाओं में एक और नाम जोड़ दिया
बेवफाओं में एक और नाम जोड़ दिया
तुझसे शिकवा नहीं है तेरी बेवफाई का
तूने असली नक़ाब रुख से आज छोड़ दिया
तूने असली नक़ाब रुख से आज छोड़ दिया
No comments:
Post a Comment