फ़रिश्ते ने कहा कि साथ चल ज़न्नत दिलाता हूँ,
ख़बर उसको नहीं कि गाँव ये ज़न्नत से बढ़ कर है !!
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चलो कुछ तो हुआ उनपर असर मेरी भी बातों का,
यहाँ पर कौन किसकी बातों की परवाह करता है !
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न जाने क्यूँ मुझे उनकी यही एक बात भाती है,
वो सब कुछ जानकर भी मुझसे ही अनजान बनते हैं !!
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तुझे गुमान है ग़र तू बहुत ही खूबसूरत है,
ये शक है कि मुझे बस तेरी ही तेरी ज़रूरत है
तो सुन ले ऐ हसीं नादाँ तुझे एक बात कहता हूँ,
ज़रा सी सोच ऊंची कर तुझे इसकी ज़रूरत है !
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तेरी बज़्म में जो मैं दाखिल हुआ उठी थी निगाहें कई मेरी ओर,
मैं हैरान था कुछ परेशान भी क्यूँ तेरी नज़र है नहीं मेरी ओर !!
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अगर होता पता कि वो रखा रुमाल तेरा है,
क़सम तेरी कि उसको छूने से परहेज़ मैं करता !
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वो जो खामोश बैठी है ग़ज़ल बनकर मेरे दिल में,
उसी का प्यार है की रोज़ सुबह-ओ-शाम लिखता हूँ .
ये सच है की मेरे हर शेर उसके लफ्ज़ होते हैं,
उसी की जिद पे ही शायर में अपना नाम लिखता हूँ.
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ग़ैरों से लड़ते-लड़ते जीती है जंगें हमने,
खाकर शिक़स्त बैठे अपनों के वार से !
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पाकर दीदार उनका,तबियत सुधर गई
अच्छा भला था मैं,मेरी आदत बिगड़ गई !
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अजब फितरत है चंद लोगों की,जागते-जागते भी सोते हैं
ऐसे कुछ शख़्स और भी हैं यहाँ,हँसते-हँसते भी दिल में रोते हैं !!
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सूर्य बादलों में छिपा है,तुम कहते हो अँधेरा हुआ है
हर तरफ रौशनी बिखरी पड़ी है,तुम कहते हो सवेरा हुआ है !!!
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हम ग़रीबों पे इनायत-ए-नज़र कौन करे
तेरी बेदर्द सी दुनिया में बसर कौन करे
हम तो अपने ही घर में अपनों के सताए हैं
वरना जीने के लिए खून-ए-जिगर कौन करे !!
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कल की वो नन्हीं सी बच्ची अब सयानी हो गई
पंख फैलाकर वो अब अम्बर की रानी हो गयी
रास ना आया किसी को उसकी ये स्वछंदता
अब वही बच्ची यहाँ बीती कहानी हो गई !!
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वो लड़की आज कल किसके नशे में चूर रहती है
ना जाने कौन से हालात से मजबूर रहती है
मैं उससे दूर रहकर भी उसी के पास रहता हूँ
वो मेरे पास रह कर भी मुझी से दूर रहती है
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ज़माने को कभी गजलों में दर्द-ए-दिल बताता था
ये दुनिया तब मेरे हालात पर खुशियाँ लुटाती थी
लगी थी टूटने हर दर्द और ज़ख्मों की ज़ंजीरें
मेरी खामोशी जब मुझ पर ही दिल और जाँ लूटाती थी !!!
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हजारों लोग रहते हैं यहाँ ,ये घर नहीं कोई
है साया इनके ऊपर एक सा अंबर नहीं कोई
दुखों के एक डोरी से यहाँ बंधे हैं सब के सब
ये फिर भी टूट जाते हैं, यहाँ पत्थर नहीं कोई !
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दुआ रब से ये है मेरी कि हर खुशियाँ मिले तुझको
ख़ुदा से आज तेरे हिस्से का हर गम मैं लेता हूँ;
न मेरे पास है वो चीज़ जो तुझसे भी बढ़कर हो
मैं बस अल्फाज़ से तुझको मुबारकबाद देता हूँ !!!
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लोग कहते हैं,सच्ची मोहब्बत सिर्फ एक बार होती है
मेरा ख्याल है, अगर मोहब्बत सच्ची हो तो बार-बार होती है!
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अदा दिल को सताने की, हसीनों से कोई सीखे;
वो देकर ज़ख्म दिल को,पूछते हैं हाल कैसा है !
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उजाला इस क़दर फैला यहाँ तेरी मोहब्बत का,
कि तेरा चाँद तेरी रौशनी में आज ही ग़ुम है !!
ये ज़रूरी नहीं कि तू वो ही कहे जो मुझे पसंद हो,
ज़रूरी है कि तू वो ना कहे जो मुझे नापसंद हो !!
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तुझे हर वक़्त सजदे में मैं अपनी याद करता हूँ,
तेरा दीदार हो रब से यही फ़रियाद करता हूँ
मैं अंजाँ हूँ मेरे बारे में तेरी सोच कैसी है,
बस इतना जानता हूँ कि मैं तुझसे प्यार करता हूँ !!
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बहुत नादान हूँ मैं,आपकी इज्ज़त जो करता हूँ
कभी ना बात कोई आप बा-तहज़ीब कहती हैं;
मैं अपनी बेबसी पर आज भी ख़ामोश रहता हूँ
न जाने आप क्यूँ आखिर मुझे पागल समझती हैं !
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मै तुझे सोचा था जो समझा था,,वो पाया नहीं
दोस्ती के मायने अब तक तुझे आया नहीं !!
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न जाने आज का दिन क्या नयी सौगात लाया है,
कि मेरा यार मेरे पास अरसे बाद आया है !!
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तुझे आगाह करता हूँ कि उससे इश्क न फरमा,
वगरना बेवफाई कर वो इक दिन भूल जाएगी !!
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शिक़ायत हर कोई सुनता यहाँ ख़ामोश होठों की,
मगर हँसता हुआ चेहरा यहाँ कोई नहीं पढता !
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मैं ये नहीं कहता कि औरों के घरों में दिए जलाओ,
बस ये इल्तजा है कि किसी के घर का दिया न बुझे !!
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अंधरे में रहकर उजाले को देखो,
वहाँ भी तुम्हें एक अंधेरा मिलेगा।
इसी मोड़ पर कल मिला साँझ तुझको
इसी मोड़ पर अब सवेरा मिलेगा।
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जेब में सिक्के पड़े थे, खो गए
आज सब अपने पराए हो गए।
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हर किसी का हिसाब होता है,
झूठ जब बेनकाब होता है।
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जब भी आया करे तुम्हें हिचकी,
मुझको इक बददुआ अता करना।
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जो उसको ढूँढ़ने निकला मिला इक आदमी से मैं,
मगर मिलने पे ये क्या, मैं खुदी को भूल कर आया।
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ज़माने भर के लोगों से मिला हूं,
मिले ख़ुद से ज़माना हो गया है।
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मिले उससे ज़माना हो गया है,
ये रिश्ता अब पुराना हो गया है।
हम अपने ख़्वाब को बस छोड़ आए,
अलग उसका ठिकाना हो गया है।
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