रो पड़ी फिर आज धरती, हाय ! ये फिर क्या हुआ
गोद में मेरी ये ये कैसा रक्त है बिखरा हुआ
गोद में मेरी ये ये कैसा रक्त है बिखरा हुआ
कल तलक थे चैन में जो,आज वो बेचैन हैं
आज इस हलचल में ये,बरसे हुए क्यों नैन हैं
आज इस हलचल में ये,बरसे हुए क्यों नैन हैं
बूढ़े बच्चे और जवाँ, ख़ामोश थे सोये हुए
देख कर यह दृश्य थे भगवान भी रोये हुए
देख कर यह दृश्य थे भगवान भी रोये हुए
थी सभी की आत्माएं एक आहें भर रहीं
खो रहा इंसान है.इंसानियत भी मर रही
खो रहा इंसान है.इंसानियत भी मर रही
रह रही इन बस्तियों में एक नन्ही जान है
था जो ख़ुशियों से भरा घर,बन गया शमशान है
था जो ख़ुशियों से भरा घर,बन गया शमशान है
हे मनुज ! तू जाग जा,अब वक़्त वो है आ गया
डाल डेरा सबके मन पर,है अँधेरा छा गया
डाल डेरा सबके मन पर,है अँधेरा छा गया
गर नहीं बदला तू अब तो,नष्ट होगी ये धरा
गूंजता होगा ये स्वर,शमशान में तब दुःख भरा
गूंजता होगा ये स्वर,शमशान में तब दुःख भरा
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