सह के हर ग़म वो जो खामोश चले जाते हैं
बाद मरने के हमें याद बहुत आते हैं
मुस्कुराते हुए होठों से ना ग़म है ज़ाहिर
ग़र कभी तनहा हो,तो अश्क निकल आते हैं
लोग कहते जिसे अपना वो महज धोखा है
जाने हर बार ये धोखे में क्यों पड़ जाते हैं
हैं जो क़ातिल मेरे अरमान,मेरी खुशियों के
वो ज़नाजे पे मेरे फूल चढ़ा जाते हैं
जीते जी हो ना सके दिल के मेरे वो करीब,
आज मैय्यत पे मेरी अश्क बहा जाते हैं
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