Wednesday, 25 January 2017

हे गुरुवर, आपके चरणों में हम शत-शत शीश झुकाते हैं

अज्ञान तिमिर को दूर करे
वो ज्ञान की लौ फैलाते हैं
हे गुरुवर ! आपके चरणों में
हम शत-शत शीश झुकाते हैं


साक्षात त्रिदेव के रूप हैं वो
उनके दर्शन से पाप कटे
गुरुदेव कृपा जिसे मिल जाये
वो पल भर में इतिहास रचे
हर संकट उनसे दूर रहे
जो तेरी छाया पाते हैं
हे गुरुवर ! आपके चरणों में
हम शत-शत शीश झुकाते हैं !


अब याचक बन कर हे गुरुवर !
‘कुंदन’ तेरे दर आया है
तुझसे विद्या धन पाने को
खाली झोली फैलाया है
जिसने भी पाया ज्ञान तेरा
सर्वत्र वो पूजे जाते हैं
हे गुरुवर ! आपके चरणों में
हम शत-शत शीश झुकाते हैं !


हम पापी हैं और कपटी भी
सम्मान तेरा क्या कर पायें
इस योग्य भी नहीं हम गुरुवर
तुझको कुछ अर्पण कर पायें
कुछ टूटे-फूटे शब्दों में
हम तेरी महिमा गाते हैं
हे गुरुवर ! आपके चरणों में
हम शत-शत शीश झुकाते हैं !

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