Friday, 20 January 2017

ख़ुदाया उनपे कोई भी मुक़दमा क्यों नहीं चलता

ख़ुदाया उनपे कोई भी मुक़दमा क्यों नहीं चलता
यहाँ हर ऱोज जिन आँखों से क़त्ले आम होती है


यहाँ मौसम बदलता है तेरी जुल्फें बिखरने से
जो उठ जाये तो सुबह हो,गिरे तो शाम होती है


तुझे हर वक़्त देखूं फूलों में कलियों में गुलशन की
कि इन फूलों से भी प्यारी तेरी मुस्कान होती है


नशा मिलता नहीं मैखानो में,साक़ी कि जामो में
नशा आता है जब महबूब-ऐ-नजर-ऐ-जाम होती है


मेरी बातों से नफरत दिल कि बदली है मोहब्बत में
मोहब्बत आज मेरी मुझसे ही बदनाम होती है


मोहब्बत होती है दौलत से,दिल से कौन करता है
मोहब्बत आज हर बाज़ार में नीलाम होती है l

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