ख़ुदाया उनपे कोई भी मुक़दमा क्यों नहीं चलता
यहाँ हर ऱोज जिन आँखों से क़त्ले आम होती है
यहाँ मौसम बदलता है तेरी जुल्फें बिखरने से
जो उठ जाये तो सुबह हो,गिरे तो शाम होती है
तुझे हर वक़्त देखूं फूलों में कलियों में गुलशन की
कि इन फूलों से भी प्यारी तेरी मुस्कान होती है
नशा मिलता नहीं मैखानो में,साक़ी कि जामो में
नशा आता है जब महबूब-ऐ-नजर-ऐ-जाम होती है
मेरी बातों से नफरत दिल कि बदली है मोहब्बत में
मोहब्बत आज मेरी मुझसे ही बदनाम होती है
मोहब्बत होती है दौलत से,दिल से कौन करता है
मोहब्बत आज हर बाज़ार में नीलाम होती है l
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