मेरी आँखों ने मेरी जान को जाते देखा
आज गुज़रे हुए हर वक़्त को आते देखा
बाद मुद्दत के मेरी यार से नजरें थी मिलीं
चंद मुस्कान से अश्कों को छिपाते देखा
जिसने ठुकराया मोहब्बत को मेरे इस दिल को
उनको राह-ए-वफ़ा में ठोकरें खाते देखा
लूट कर खुशियाँ जो गैरों की,हँसा करते थे
आज खुशियों को अपने घर की,लुटाते देखा
उस सितमगर के सितम का ही ये अंजाम हुआ
आज नज़रों ने बेज़ुबान को गाते देखा
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