वो मुझसे दूर रहकर भी मेरा हर ग़म समझती है
कभी बीमार हो जाऊं तो सारी रात जगती है
कभी बेटे के दिल का दर्द माँओं से नहीं छिपता
मैं जब हँसता हूँ, माँ हँसते हुए चेहरे को पढ़ती है !!
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बड़े ही प्यार से हर गलतियाँ मेरी छिपाती है
मेरी नाकामियों को भी वो सीने से लगाती है
मुझे हज की नहीं परवाह ना ही चारों धामों की
क़दम उसके मैं चूमूँ दुनिया जिसको ‘माँ’ बुलाती है !!
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