Thursday, 28 September 2023

इंसान

बीमारी इंसान को मार देती है
गरीबी इंसान को मार देता है
मजबूरी इंसान को मार देता है
हादसे इंसान को मार देते हैं
इंसान भी इंसान को मार दे !
हे भगवान !!

Sunday, 17 September 2023

दिन भर का काम मुझको थकाती कभी नहीं।

दिन भर का काम मुझको थकाती कभी नहीं,
हो जाता हूं बेजान जब भी तुझको देख लूं।

Thursday, 5 May 2022

फिर मिले

बरसों बाद मिले उनसे, हुई न कोई बात,
वो अपनों के साथ थे, हम अपनों के साथ।

Sunday, 11 October 2020

वह ग़रीब लाचार भला क्यूँ कर देखे!

वह ग़रीब लाचार भला क्यूँ कर देखे
राजा अपनी हार भला क्यूँ कर देखे

धरम-जाति के बल पर सत्ता पाते हैं
मानवता का प्यार भला क्यूँ कर देखे

Wednesday, 29 May 2019

आपके नाम।

काश! ऐसा होता कि आप जिसे चाहें वो भी आपको चाहने लगे। जीवन कितना अच्छा होता न। पर ऐसा नहीं होना ही जीवन को और भी अच्छा बनाता है। मन पर किसी का वश नहीं, वो कभी भी किसी को भी चाहने लगता है। बचपन से जवानी तक जीवन कई दौर से गुज़रता है। रिश्ते भी बदलते जाते हैं। हो सकता है कल तक आप जिसके बारे में सोचते भी नहीं थे आज वो आपके मन में बस जाए। यह एक इत्तिफाक है हाँलाकि कई बार प्यार बचपन से जवानी का सफ़र भी तय करता है ख़ैर उसे छोड़िये। आपके लिए यह भावना पहले भी थी, पर अचेतावस्था में। कई बार आप किसी रिश्ते को लेकर इतने गंभीर होते हैं कि उसे खोने के डर से उसे पाने का ज़िक्र तक नहीं कर पाते। यह भी संभव नहीं कि आप जिसे चाहें वो आपको मिले या वो भी आपके बारे में ऐसी भावना रखते हों। पर एक बात का ध्यान ज़रूर रखा जाना चाहिए, यदि कोई आपको प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यह एहसास दिला रहा है कि वो आपको चाहता है और आप उसे पसंद हैं। उसकी इस भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी का किसी के प्रति प्रेम या आकर्षण उसे ग़लत लोगों की श्रेणी में लाकर खड़ा नहीं करता है। अगर आप उस रिश्ते को लेकर सहज नहीं हैं तो आप उसे बेख़ौफ़ कह दें, बजाय उसकी बातों को नज़रअंदाज़ करने के। आप उसे समझा भी सकते हैं या उसके लिए अपनी भावना बता सकते हैं। इससे सामने वाले को कुछ देर के लिए बुरा तो लगेगा पर कुछ दिनों में ही वह आपकी बात समझ जाएगा। आप दिल के बड़े हैं, अच्छे हैं, उसे समझाइये ताकि वो भी ख़ुश रहे और आप भी ( अगर उसकी वजह से दुखी हैं तो ) अगर आप समझाने में खुद को असमर्थ पाते हैं तो अमुक व्यक्ति को ब्लॉक भी कर सकते हैं। जवाब देने का एक तरीका यह भी है ( यह सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जहाँ कोई रिश्ता नहीं है ) । उम्मीद है आप समझेंगे। अगर नहीं तो सामने वाले को अपने आत्म-सम्मान को ध्यान में रख कर आपको ब्लॉक कर देना चाहिए ताकि वो आपको धर्म संकट (अगर कोई है) से बाहर निकाल सके।
सोचिये!

Wednesday, 25 January 2017

गणतंत्र दिवस की पूर्व रात्रि जब खाना खा कर सोया था


गणतंत्र दिवस की पूर्व रात्रि जब खाना खा कर सोया था
अपने स्वदेश की चिंता मेंकुछ सोच सोच मैं रोया था



सुनकर आहट कुछ क़दमों की साँसें थीं मेरी थमी हुई
हैरान था मन उस छाया पर आँखें थीं मेरी जमी हुई
पूछा मैंने फिर -कौन हो तुम,क्यों हो थोड़ी सी डरी हुई
कुछ बोलो भी क्यों मौन हो तुम क्यों आँख है तेरी भरी हुई



कुछ शब्द जो उसने कहे तभी,सुनकर पहुंचा दिल को सदमा
मेरा परिचय क्या पूछते हो, वो बोलीं -”मैं हूँ भारत माँ”
हालत पाकर अपनी माँ की,वह देख के दिल था तड़प उठा
छाया था आगे अँधेरा सुनकर उनकी वो दर्द व्यथा



डरती हूँ मैं बस अपनों से करते हैं मेरा ख्याल नहीं
अपनी माँ की रक्षा जो करे,क्या ऐसा कोई लाल नहीं ?



भ्रस्टाचारी कुछ लोग हैं जो आतंक भय फैलाते हैं
नारी है जो देवी सामान उन्हें पाकर भूख मिटाते हैं
कुछ धन-दौलत की चाह में जो दूजों का खून बहाते हैं
धिक्कार है ऐसे लोगों पर जो जीवन ऐसा पाते हैं



कहते-कहते माँ फूट पड़ीं बोली वादा तू मुझसे कर
धर्म,नीति,के रास्तों में रहना है तुझे अविरल-अविचल



लेटा मैं उनके चरणों में बोल आशीष मुझे दो माँ
कर सेवा तेरी सत्य से ही फिर कर दूँ अपना देश महान

माँ

वो मुझसे दूर रहकर भी मेरा हर ग़म समझती है
कभी बीमार हो जाऊं तो सारी रात जगती है
कभी बेटे के दिल का दर्द माँओं से नहीं छिपता
मैं जब हँसता हूँ, माँ हँसते हुए चेहरे को पढ़ती है !!

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बड़े ही प्यार से हर गलतियाँ मेरी छिपाती है
मेरी नाकामियों को भी वो सीने से लगाती है
मुझे हज की नहीं परवाह ना ही चारों धामों की
क़दम उसके मैं चूमूँ दुनिया जिसको ‘माँ’ बुलाती है !!