गैरों के किसी बात पे जाया नहीं करते
हर बात पर यूँ अश्क बहाया नहीं करते
हर बात पर यूँ अश्क बहाया नहीं करते
जो पल हैं ज़िन्दगी के वो हँस कर गुज़ारिए
गुज़रे हुए ये पल कभी आया नहीं करते
गुज़रे हुए ये पल कभी आया नहीं करते
छोटे-बड़े सभी हैं औलाद ख़ुदा के
अपने लिए अपनों को सताया नहीं करते
अपने लिए अपनों को सताया नहीं करते
खुशियाँ मनानी है तो दिए जलाइयॆ
छोटे से किसी घर को जलाया नहीं करते
छोटे से किसी घर को जलाया नहीं करते
लगते यहाँ अपने हैं सब,अपना नहीं कोई
हर एक को हर बात बताया नहीं करते
हर एक को हर बात बताया नहीं करते
न बाँट सका दर्द है कोई भी किसी का
ग़ैरों को अपना ज़ख्म दिखाया नहीं करते
ग़ैरों को अपना ज़ख्म दिखाया नहीं करते
कीजै मदद सभी की कहता है ये ‘कुंदन’
एहसान जो किया वो जताया नहीं करते
एहसान जो किया वो जताया नहीं करते
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