Tuesday, 17 January 2017

अश्कों से अपनी आँखें भिगोता रहा हूँ मैं

अश्कों से अपनी आँखें भिगोता रहा हूँ मैं
हर रात तेरी याद में रोता रहा हूँ मैं

आवाज़ से मेरी तेरा डर से वो सिहरना
आलम है ये तन्हाई से डरता रहा हूँ मैं

तेरे साथ रह के मुझको न जीना कबूल था
बिछड़ा जो तुझसे हर पल मरता रहा हूँ मैं

रहता हूँ मैं जिस दिल में वो है मेरे करीब
अन्जान इसी बात से होता रहा हूँ मैं

न जान सका तेरी मोहब्बत को ऐ सनम
अपने ही दिल में कांटे बोता रहा हूँ मैं

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