Friday, 20 January 2017

आज अपने सभी पराये नज़र आते हैं

आज अपने सभी पराये नज़र आते हैं,
यहाँ सब अपनों के सताये नज़र आते हैं


जिनकी रहमत से थी, सभी की ज़िन्दगी संवरी
उस मसीहे को सब भुलाये नज़र आते हैं


हमने देखे हैं, कई शख्स यहाँ ऐसे हैं
लब पे मुस्कान, ग़म छुपाये नज़र आते हैं


बातें करते थे जो ईमान औ सच्चाई की
असली चेहरा वो ही छुपाये नज़र आते हैं


उनकी नज़रों को, मेरा इंतज़ार रहता था
आज मुझसे नज़र चुराए नज़र आते हैं


जिन्हें नफरत थी मेरी थोड़ी- थोड़ी बातों से,
आज गीतों को मेरी गाये नज़र आते हैं.

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