Wednesday, 29 May 2019

आपके नाम।

काश! ऐसा होता कि आप जिसे चाहें वो भी आपको चाहने लगे। जीवन कितना अच्छा होता न। पर ऐसा नहीं होना ही जीवन को और भी अच्छा बनाता है। मन पर किसी का वश नहीं, वो कभी भी किसी को भी चाहने लगता है। बचपन से जवानी तक जीवन कई दौर से गुज़रता है। रिश्ते भी बदलते जाते हैं। हो सकता है कल तक आप जिसके बारे में सोचते भी नहीं थे आज वो आपके मन में बस जाए। यह एक इत्तिफाक है हाँलाकि कई बार प्यार बचपन से जवानी का सफ़र भी तय करता है ख़ैर उसे छोड़िये। आपके लिए यह भावना पहले भी थी, पर अचेतावस्था में। कई बार आप किसी रिश्ते को लेकर इतने गंभीर होते हैं कि उसे खोने के डर से उसे पाने का ज़िक्र तक नहीं कर पाते। यह भी संभव नहीं कि आप जिसे चाहें वो आपको मिले या वो भी आपके बारे में ऐसी भावना रखते हों। पर एक बात का ध्यान ज़रूर रखा जाना चाहिए, यदि कोई आपको प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से यह एहसास दिला रहा है कि वो आपको चाहता है और आप उसे पसंद हैं। उसकी इस भावना का सम्मान किया जाना चाहिए। किसी का किसी के प्रति प्रेम या आकर्षण उसे ग़लत लोगों की श्रेणी में लाकर खड़ा नहीं करता है। अगर आप उस रिश्ते को लेकर सहज नहीं हैं तो आप उसे बेख़ौफ़ कह दें, बजाय उसकी बातों को नज़रअंदाज़ करने के। आप उसे समझा भी सकते हैं या उसके लिए अपनी भावना बता सकते हैं। इससे सामने वाले को कुछ देर के लिए बुरा तो लगेगा पर कुछ दिनों में ही वह आपकी बात समझ जाएगा। आप दिल के बड़े हैं, अच्छे हैं, उसे समझाइये ताकि वो भी ख़ुश रहे और आप भी ( अगर उसकी वजह से दुखी हैं तो ) अगर आप समझाने में खुद को असमर्थ पाते हैं तो अमुक व्यक्ति को ब्लॉक भी कर सकते हैं। जवाब देने का एक तरीका यह भी है ( यह सिर्फ़ उन लोगों के लिए है जहाँ कोई रिश्ता नहीं है ) । उम्मीद है आप समझेंगे। अगर नहीं तो सामने वाले को अपने आत्म-सम्मान को ध्यान में रख कर आपको ब्लॉक कर देना चाहिए ताकि वो आपको धर्म संकट (अगर कोई है) से बाहर निकाल सके।
सोचिये!

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